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जमानत देने के आदेश पर केवल विशेष परिस्थितियों में अपवाद स्वरूप ही रोक लगनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली
 सुप्रीम कोर्ट ने  एक अहम फैसले में साफ किया है कि जमानत देने के आदेश पर यूं ही रोक नहीं लगनी चाहिए। केवल विशेष परिस्थितियों में अपवाद स्वरूप ही जमानत के आदेश पर रोक लगाई जा सकती है। जस्टिस एएस ओका की अध्यक्षता वाली बेंच ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में एक आरोपित की जमानत पर रोक लगाने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को रद्द हुए ये टिप्पणी की।

दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग मामले के एक आरोपित परविंदर सिंह खुराना ने हाई कोर्ट की ओर से जमानत पर रोक के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को सुनवाई करते हुए इस पर आश्चर्य जताया था कि हाई कोर्ट ने बिना कोई वजह बताए ही नियमित जमानत के आदेश पर रोक लगा दिया था। ट्रायल कोर्ट ने जून 2023 में ही आरोपित को जमानत दी थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश को ईडी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने सभी पहलूओं पर गौर नहीं किया। इस मामले की सुनवाई से कई जज हट चुके थे। एक जज तो फैसला सुरक्षित करने के बाद हटे। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी हाई कोर्ट के एक पंक्ति के रोक के आदेश का कैसे बचाव कर सकती है जबकि ट्रायल कोर्ट ने पूरी वजह बताते हुए जमानत दी है।

 

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