ज्योतिष

2026 का हिंदू नववर्ष खास: 13 महीनों का अद्भुत संवत्सर, जानें क्या है इसका महत्व

नई दिल्ली
Adhik Maas 2026 : वर्ष 2026 आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिसके कारण साल में 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून 2026 तक की इस अतिरिक्त अवधि को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा।

खगोलीय विज्ञान और अधिक मास का आधार
अधिक मास का सीधा संबंध सूरज और चंद्रमा की चाल के बीच के अंतर को पाटने से है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच करीब 11 दिनों का फासला रह जाता है। जब यह अंतर बढ़ते-बढ़ते 30 दिनों के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय गणना के कारण 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है।
 
पौराणिक कथा और पुरुषोत्तम नाम की महिमा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' देकर इसे अत्यंत पवित्र बना दिया। इसी मास का संबंध भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के वध से भी जोड़ा जाता है। चूंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे साल के 12 महीनों में से कोई नहीं मार पाएगा, इसलिए भगवान ने इस 13वें महीने का सृजन कर अधर्म का अंत किया। यह समय धर्म की स्थापना और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय
पंडितों और विद्वानों का मानना है कि अधिक मास कोई अशुभ समय नहीं है बल्कि यह ईश्वर की भक्ति के लिए रिजर्व रखा गया समय है। 17 मई से 15 जून के बीच अधिक मास महात्म्य का पाठ करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है। यह अवधि हमें भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर आत्म-मंथन करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
 
वर्जित कार्य और विशेष सावधानी
चूंकि यह समय पूरी तरह से ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित है, इसलिए इस दौरान सांसारिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अधिक मास में निम्नलिखित कार्य टाल देने चाहिए:

विवाह और सगाई के कार्यक्रम।
नया व्यापार या दुकान की शुरुआत।
गृह प्रवेश और भूमि पूजन।
मुंडन, जनेऊ या अन्य संस्कार।

दान-पुण्य और लोकहित का महत्व
इस महीने में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना, हवन और गीता का पाठ करना इस समय की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। यह महीना हमें सिखाता है कि सेवा और सकारात्मक सोच ही जीवन में वास्तविक सुख और शांति लाती है।

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com