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ज्योतिष

पहली रोटी गाय और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाने के पीछे क्या है धार्मिक और वास्तु महत्व?

वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारी सेहत, समृद्धि और मानसिक शांति से होता है. रसोई में बनने वाली रोटी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा को भी तय करती है. रोटी बनाते, सेकते और सर्व करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है. वहीं शास्त्रों के अनुसार, जहां पहली रोटी गाय की निकाली जाती है, वहीं आखिरी रोटी कुत्ते की निकाली जाती है. चलिए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या नियम है.

पहली रोटी गाय के लिए क्यों?
हिंदू धर्म के मुताबिक, गाय व गौ माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है. मतलब की गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है. पहली रोटी (जिसे 'गोग्रास' कहते हैं) गाय को खिलाने से घर में सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है. इससे वास्तु दोष भी दूर होते हैं.

आखिरी रोटी कुत्ते के लिए क्यों?
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुत्ते को मुख्य रूप से भैरव बाबा की सवारी और राहु-केतु का प्रतीक माना जाता है. आखिरी रोटी पर थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर या सामान्य रूप से कुत्ते को खिलाने से कुंडली में राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव और शनि दोष (साढ़ेसाती या ढैय्या) शांत होते हैं. वहीं, माना जाता है कि कुत्ता घर पर आने वाली अदृश्य बाधाओं और संकटों को अपने ऊपर ले लेता है.

ध्यान रखने योग्य कुछ अन्य जरूरी नियम
अग्नि ग्रास (चूल्हे की रोटी)
कई घरों में पहली रोटी बनाने से पहले आटे का एक छोटा सा हिस्सा तोड़कर चूल्हे या अग्नि देव को समर्पित किया जाता है, जिसे अग्नि ग्रास कहते हैं. इसके बाद पहली पूरी रोटी गाय की निकाली जाती है.

अतिथियों और पक्षियों का स्थान
गाय और कुत्ते के अलावा, भोजन का एक हिस्सा पक्षियों (कौवे) और चींटियों के लिए भी निकालने का विधान है, जिसे 'पंचबलि कर्म' कहा जाता है.

बासी या बची-कुची रोटी न दें
अक्सर लोग सबसे छोटी, जली हुई या बची हुई आखिरी रोटी कुत्ते को देते हैं. वास्तु के अनुसार ऐसा करने से बचना चाहिए. आखिरी रोटी भी पूरी और साफ-सुथरी होनी चाहिए.

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