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ओमिक्रॉन संकट के बीच में रेजिडेंट डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना कितना जरूरी.

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ऑमिक्रॉन संकट (Omicron Crisis) के बीच नीट पीजी काउंसलिंग (NEET PG Counselling) में देरी की वजह से देशभर के 10 हजार से ज्यादा रेजिडेंट डॉक्टर (Resident Doctors) हड़ताल (Strike) पर हैं. दिल्ली (Delhi) के बड़े अस्पतालों (Hospitals) जैसे सफदरजंग, जीटीबी, लोकनायक, आरएमएल, जीटीबी और गुरु तेग बहादुर अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर भी शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए हैं. इन डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं. हालांकि इस हड़ताल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के रेजिडेंट डॉक्टर्स शामिल नहीं हैं. देश में ओमिक्रॉन की दस्तक और कोरोना की तीसरी संभावित लहर के बीच इन रेजिडेंट डॉक्टरों का हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था अगले कुछ दिनों में और चरमरा सकती है. हालांकि पिछले सप्ताह ही स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल के बाद इन डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले लिया था और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है. इसके बावजूद डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना कई कितना जायज है