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वास्तु शास्त्र: छाया वेध और कोण वेध से घर-व्यापार पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

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घर या किसी भी व्यवसायिक स्थान, दुकान पर किसी भी वस्तु की छाया आना दोषपूर्ण होता है। घर पर किसी भी टॉवर, वृक्ष या धार्मिक स्थल में बने ऊंचाई की छाया पड़ती है तो ऐसे में घर में रहने वाले या व्यवसायिक स्थल पर काम करने वालों को पर्याप्त धन लाभ होते हुए भी नित नई-नई परेशानियों और तनावों का सामना करना पडता है। वास्तुशास्त्र के नियमों को मानें तो छाया वेध के कारण घर में आकस्मिक घटनाएं घटने की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं, यही छाया वेध व्यवसाय स्थल पर होने से वहां कार्य करने वालों को भी तनाव में रखता है, जिससे लाभ की अपेक्षा घाटे की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं। कुल मिलाकर छाया वेध से घर व व्यवसायिक मालिक के लिए रोग, धन-यश नाशक दरिद्रजनक स्थिति होती है, अतः घर या दुकान खरीदते समय इस बात पर अवश्य ध्यान दें कि कहीं आपके घर, दुकान पर किसी की छाया तो नहीं पड़ रही।

कोण वेध- कोण वेध भी वास्तु शास्त्र के निमयों के अनुसार अनिष्टकारक होता है, जैसे दुकान या व्यवसाय स्थल के प्रवेश द्वार के ठीक सामने अन्य किसी इमारत का कोना आ जाता है, उसे कोण वेध कहते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रवेश द्वार को परिवर्तित कर देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो द्वार को गोलाई युक्त करवा देने से भी कोण वेध कम हो जाता है।

द्वार वेध- द्वार संबंधी किसी भी रुकावटे या बाधा, असुविधा या विकृति को द्वार वेध कहा जाता है। यह अक्सर हानि, दुख और अपयश का कारण बनता है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि समस्त द्वार खुलते और बंद होते समय भूमि में रगड़, किसी प्रकार की आवाज, उपयोग करते समय भारी होना, कठोर होना या तेज गति से खुलना बंद होना द्वार वेध होता है, इससे प्रगति, सुख, व्यवसाय मार्ग के रास्ते अवरोधित हो जाते हैं, अतः समस्त प्रकार के वेध अवरोध से बचना चाहिए।