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पुरी रथयात्रा 2026: रथ निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार, मूर्तिकारों की अद्भुत कलाकारी ने मोहा मन

 पुरी
 भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के लिए तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पुरी में रथों के निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ ली है, जहां पारंपरिक सेवक अपनी पूरी निष्ठा के साथ रथों को भव्य रूप देने में जुटे हैं।

रथ निर्माण की अद्यतन स्थिति 
रथों के निर्माण में तकनीकी और कलात्मक दोनों पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य महाराणा की देखरेख में साथी महाराणा और भोई सेवकों के सहयोग से निर्माण कार्य निरंतर जारी है।

        द्वार बेढ़ा और पटाबाड़िया: तीनों रथों के लिए निर्धारित 12 द्वार बेढ़ों में से प्रत्येक रथ के लिए दो-दो द्वार बेढ़ों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।  

वहीं, रथों की वेदी के चारों ओर 'पटाबाड़िया' (लकड़ी की घेराबंदी) का कार्य अंतिम चरण में है। 13 परस्त पोटल स्थापित होने के बाद, शेष चार कोनों पर भी जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा।

        कलात्मक नक्काशी: रूपकार सेवकों की मेहनत रथों की सुंदरता में चार चांद लगा रही है। तीनों रथों के 24 नाटगोड़ों में से 12 पर कंदर्प रूप की नक्काशी पूरी हो चुकी है।  

शेष 12 पर काम तेजी से चल रहा है, साथ ही पूर्ण हो चुकी प्रतिमाओं को पॉलिश और अलंकृत करने का काम भी जारी है।

        कलश और पंखुड़ी: रथों के बड़े कलश पेंडी और 32 पंखुड़ियों का निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है, जो रथों की भव्यता को और बढ़ा रहे हैं।

तकनीकी और सुरक्षात्मक कार्य
निर्माण के साथ-साथ रथों की मजबूती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दोलवेदी स्थित अस्थायी कमारशाला में ओझा कमार सेवक रथों के जोड़ स्थानों के लिए लोहे के उपकरण तैयार कर रहे हैं। 

इसमें एल-क्लैम्प, यू-क्लैम्प और कलश कांटे शामिल हैं। इसके अलावा, पहियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महाराणा सेवकों द्वारा धुरी (पई) के जोड़ स्थानों पर नट-बोल्ट की सहायता से लोहे की प्लेटें फिट की जा रही हैं।

नाटगोड़ों पर चढ़ाया जा रहा रंगों का लेप 
चित्रकार सेवकों की सक्रियता ने रथों को जीवंत कर दिया है। पोटल पाराभाड़ी पर रंगाई का काम पूरा होने के बाद, अब पार्श्व देव-देवियों की प्रतिमाओं, शिखर डमरू, आंवला, उलट शुआ और नाटगोड़ों पर रंगों का लेप चढ़ाया जा रहा है। 

इन बाहरी सजावटों के साथ रथ अब धीरे-धीरे अपने दिव्य स्वरूप में ढल रहे हैं। विभिन्न सेवकों की इस सामूहिक सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट है कि रथयात्रा की तैयारियां अपने पूर्णता की ओर अग्रसर हैं, जिससे भक्तों में उत्साह का माहौल है। 

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