केरल (Kerala) से पहले गैर-भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र अपने यहां सीबीआई की बिना इजाजत एंट्री पर बैन लगा दिया है.
केरल सरकार (Kerala) ने राज्य की सीमा के भीतर काम करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को दी गई आम सहमति को वापस लेने का फैसला किया है. जांच एजेंसी को अब वहां मामले दर्ज करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.
गैर-भाजपा शासित राज्यों पश्चिम बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र के बाद केरल भी इस सूची में शामिल हो गया. बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. बता दें हाल ही में लाइफ मिशन ’हाउसिंग प्रोजेक्ट में सीबीआई केस दर्ज किया गया था. यह राज्य सरकार द्वारा बेघर लोगों को आवास देने की प्रमुख पहल थी.
लाइफ मिशन परियोजना में कथित तौर पर विदेशी अंशदान (विनियमन) कानून (एफसीआरए) का कथित उल्लंघन और भ्रष्टाचार केरल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने आरोप लगाया है कि सोना तस्करी मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने एनआईए की अदालत के सामने स्वीकार किया कि उसे परियोजना से एक करोड़ रुपये का कमीशन मिला. विपक्ष ने आरोप लगाया कि रेड क्रिसेंट द्वारा ठेकेदार के चयन में भ्रष्टाचार हुआ है . अंतरराष्ट्रीय संगठन रेड क्रिसेंट ने लाइफ मिशन परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये का कोष मुहैया कराने पर सहमति जतायी थी.
केरल हाईकोर्ट ने लगा दी थी CBI जांच पर रोक
दूसरी ओर केरल हाईकोर्ट ने बेघर लोगों के लिए मकान मुहैया कराने वाली राज्य सरकार की आवासीय परियोजना ‘लाइफ मिशन’ में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच पर मंगलवार को दो महीने की रोक लगा दी. जस्टिस वी जी अरुण ने केरल सरकार की याचिका की सुनवाई के दौरान जांच पर दो महीने की रोक लगाने को मंजूरी दी. सरकार ने सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिकी को खारिज किए जाने का अनुरोध किया था.
सीबीआई ने लाइफ मिशन को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के मामले में नामजद किया है. हालांकि, अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को मामले के संबंध में एक निजी निर्माण कंपनी के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति दे दी.






