विदेश

जानिए स्पेस सुपरपॉवर बनने के लिए क्या अलग करने जा रहा है चीन

चीन (China) चंद्रमा (Moon) से चट्टान और मिट्टी के नमूने पृथ्वी (Earth) पर लाने के लिए एक अभियान की तैयारी में लगा है जो उसके स्पेस सुपरपॉवर (Space Superpower0 बनने के प्रयासों में एक और अहम कदम है.

चीन (China) की वैश्विक स्तर पर महत्वाकांक्षाएं (Global Ambitions) किसी से छिपी नहीं हैं. उसकी अमेरिका (USA) से तीखी प्रतिद्वंदिता शीत युद्ध (Cold Wars) की याद दिलाती है और इसमें अंतरिक्ष क्षेत्र भी शामिल है. पिछले कुछ सालों से चीन की स्पेस एजेंसी के कवायदें नासा (NASA) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) योजनाओं से हटकर हैं और उनसे प्रतिद्वंदिता की साफ झलक दिखती है. इसी कड़ी में अब चीन एक ऐसा काम करने जा रहा है जो पिछले चार दशक में दुनिया की किसी भी स्पेस एजेंसी ने नहीं किया. चीन चंद्रमा की चट्टानों के नमूने (Rock Samples) पृथ्वी पर लाने की तैयारी कर रहा है.

अब तक ये महत्वाकांक्षी कदम उठा चुका है चीन

पिछले साल जनवरी में ही चीन चंद्रमा के पिछले हिस्से पर अपना रोवर उतारने वाला पहला देश बना. उसने एक ही अभियान में मंगल के लिए ऑर्बिटर और रोवर एक साथ भेजे हैं अगर यह अभियान सफल हुआ तो वह ऐसा करने वाला पहले देश बन जाएगा. इसके अलावा वह खुद का एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित करने की तैयारी में है. अब वह चंद्रमा से नमूने लाने की तैयारी कर रहा है जो फिलहाल दुनिया की किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी के एजेंडे में शामिल नहीं है.

इस बड़ी योजना का हिस्सा

चीन एक मानव रहित अंतरिक्षयान प्रक्षेपित करने की तैयारी में हो चंद्रमा की चट्टानों के नमूने जमा करेंगे और वहां से पृथ्वी पर वापस लाएंगे. यह पिछले चार दशकों में किसी देश के द्वारा चंद्रमा से नमूने लाने का पहला प्रयास है. बीजिंग अपनी सेना के द्वारा चलाने वाले अभियान के लिए अरबों खर्च कर रहा है. जिसमें साल 2022 तक स्पेस स्टेशन की स्थापना के बाद इंसान तो चंद्रमा पर भेजना भी शामिल है.

यह उद्देश्य है इस अभियान का

चीन की पौराणिक चंद्रमा की देवी के नाम पर इस अभियान का नाम चांग’इ-5 रखा गया है. इसका प्रमुख लक्ष्य चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी से नमूने जमा करना है जिससे वैज्ञानिक चंद्रमा की उत्पत्ति, विकास और उसकी सतह पर ज्वालामुखी गतिविधियों को समझ सकें. चीन की आधिकारिक न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक इस अभियान का प्रक्षेपण हिनान प्रांत के दक्षिणी द्वीप वेन्चांग स्पेस सेंटर से होगा, लेकिन इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है.

तीन साल पहले होना था इसका प्रक्षेपण

चीन के इस मूल अभियान की योजना साल 2017 के लिए बनाई गई थी, लकिन चीन के लॉन्ग मार्च-5 रॉकेट के इंजन के नाकाम हो जाने के कारण  यह अभियान टल गया था. यदि यह अभियान सफल होता है कि चीन केवल तीसरा ऐसा देश होगा जिसने चंद्रमा से पृथ्वी पर नमूने लाए होंगे. इससे पहले यह काम अमेरिका और सोवियत संघ ने 1960 और 1970 के दशकों में किया था.

कहां से लाए जाएंगे नमूने

चीनी अभियान दो किलो के नमूने चंद्रमा की सतह पर ओसिनस परोसेलारम इलाके से जमा करेगा जहां अभी तक किसी भी तरह का अन्वेषण नहीं किया गया है. ओसिनस परोसेलारम का मतलब तूफानों का सागर होता है.  यह इलाका विशाल लावा के मैदान से बना है.

कब तक आ सकते हैं नमूने

यदि प्रक्षेपण सफल रहा तो प्रोब चंद्रमा पर नवंबर के अंत में पहुंचेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है. वह चंद्रमा पर उसके एक दिन यानि पृथ्वी के 14 दिनों तक रहकर नमूने जमा करेगा. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का अनुमान है कि यह अभियान नमूने लेकर दिसंबर के पहले महीने में मंगोलिया में लैंड करेगा.

क्या खास है इस अभियान में

यह अभियान काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है और इसमें कई ऐसी काम होंगे जो पहली बार किए जाएंगे और जो इससे पहले के नमूने जमा करने के किसी अभियान में नहीं अपनाए गए हैं. हालांकि नासा का पर्सवियरेंस रोवर मंगल के नमूने जमा करेगा, अमेरिका ने इससे पहले कभी रोबोट के जरिए नमूने नहीं लिए हैं. वहीं सोवियत संघ का नूमने लेना बहुत ही सीमित कार्य रहा है.इस मामले में चीन का यह सिस्टम बहुत ही लचीला और आधुनिक रोबोटिक सैम्पल रिटर्न होगा. इतना ही नहीं चांग’इ-5 चीन का महत्वाकांक्षी रॉकेट सिस्टम भी है जिसकी पेलोड ले जाने की क्षमता नासा और स्पेस एक्स के किसी भी रॉकेट से कम है.

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