मध्यप्रदेश

निजी अस्पताल 18 से 22 हजार रुपए ले रहे; जबकि जांच, किट और सर्विस चार्ज जोड़ लें तो 8 हजार आएगा खर्च

प्रदेश सहित शहर में भी इस महामारी में इंजेक्शन, ऑक्सीजन, ऑक्सीमीटर, फ्लो मीटर, दवाइयां सभी की कालाबाजारी जोरों पर है। मरीज को बचाने के लिए परिजन सभी तरह के जतन भी कर रहे हैं। अब प्लाज्मा थेरेपी से संक्रमितों का इलाज बढ़ गया है। यही कारण है कि इन दिनों शहर में प्लाज्मा की मांग बहुत बढ़ गई है। ऐसे में शहर के कई ब्लड बैंकों में प्लाज्मा के लिए लोगों के रोजाना फोन आ रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में प्लाज्मा चढ़ाने के लिए 18 से 20 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं।

इंदौर के 10 वर्ष पुराने ब्लड कॉल सेंटर का भास्कर संवाददाता ने जायजा लिया। यहां पर अशोक नायक से यह जाना कि इस कोरोना का हाल में क्या दिक्कत है आ रही है और प्लाज्मा की मांग कितनी हो गई है।

ब्लड बैंक के संचालक अशोक नायक का कहा, इस समय कॉल सेंटर में देशभर से रोजाना 4 से 5 हजार फोन कॉल आ रहे हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना की लहर में प्लाज्मा के लिए अधिक फोन आ रहे हैं। शहर में प्लाज्मा के किट की कमी आ गई है। एक-दो दिन में यह समस्या दूर हाे जाएगी।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा डोनेशन कैंप
जिला प्रशासन ने इंदौर के महात्म गांधी मेडिकल (एमजीएम) कॉलेज में प्लाज्मा बैंक की शुरुआत की है। ब्लड बैंक वालों से भी बात की, हालांकि कई निजी अस्पतालों में प्लाज्मा चढ़ाने के 18 से लेकर 22 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। भाजपा की कोर कमेटी को भी इस संबंध में ब्लड बैंक संचालकों ने एक प्रस्ताव दिया और कहा कि केवल किट और सर्विस चार्ज लिया जाए तो 8 हजार रुपए में प्लाज्मा चढ़ाया जा सकता है।

प्लाज्मा की कमी को लेकर प्रशासन ने एमजीएम कॉलेज में एक कैंप लगाया था, जिसमें कुछ युवाओं ने प्लाज्मा दान किया और कुछ ने अपना नंबर देकर भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर प्लाज्मा देने की बात कही, हालांकि कल बुलाए गए 8 डोनर में से 4 डोनर ही पहुंचे।

पिछले कुछ दिनों से शिकायतें आ रही हैं कि डोनर तो प्लाज्मा देने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन जिन्हें प्लाज्मा चढ़ाया जाना होता है वे 18 से 22 हजार रुपए का चार्ज सुनकर ही पीछे हट जाते हैं, जबकि डोनर तो प्लाज्मा फ्री में ही देते हैं।

AB पॉजिटिव वाले प्लाज्मा की डिमांड

इस समय सबसे ज्यादा मांग ब्लड ग्रुप AB पॉजिटिव वाले प्लाज्मा की हो रही है। शहर के जितने भी बड़े अस्पताल है वहीं पर उपचार के लिए भर्ती मरीजों के लिए प्लाज्मा ढूंढने का काम सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। इस एक ब्लड ग्रुप में इतनी ज्यादा मांग निकल रही है कि प्लाज्मा की व्यवस्था कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।

डीन मेडिकल कॉलेज डॉ. दीक्षित ने बताया कि प्लाज्मा गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दिया जाता है। इसकी मदद से मरीजों में रेडीमेड एंटीबॉडी वायरस से लड़ने की शक्ति मिल सके। प्रभारी डॉ. अशोक यादव ने बताया कि 8 में से 4 डोनर ने प्लाज्मा दिया। जिनसे कुल छह यूनिट प्लाज्मा प्राप्त हुआ है। साथ ही आज 10 डोनर की स्क्रीनिंग कर एंटीबॉडी की जांच भी की गई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज पॉजिटिव मरीज का डाटा बैंक बनाया है। यहां तक उनके मोबाइल नंबर ले लिया है। ताकि उन्हें भी प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

क्या है प्लाज्मा थेरेपी?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो प्लाज्मा, खून का तरल हिस्सा होता है, जिसमें लाल और सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स होते हैं। कोरोना वायरस इंफेक्शन से रिकवर होने वाले मरीज का प्लाज्मा लेकर उसे कोविड-19 बीमारी से संक्रमित मरीज को दिया जाता है।प्लाज्मा में ही एंटीबॉडीज होती हैं जो संक्रमित मरीज के इम्यून सिस्टम को इस जानलेवा बीमारी से लड़ने में मदद करती है। इससे संक्रमित मरीज के लक्षणों में कमी होने लगती है और मरीज की रिकवरी प्रक्रिया तेज हो जाती है।वैसे तो अब तक इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। कि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना मरीज के लिए सचमुच कारगर है या नहीं. लेकिन कई स्टडी में यह बात सामने आयी है कि कोरोना से रिकवर होने में यह थेरेपी मदद करती है और मरीज के अस्पताल में रहने का समय भी कम हो जाता है।

प्लाज्मा डोनेट करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

केंद्र सरकार ने एक पूरी लिस्ट तैयार की है कि कौन से लोग, कब और किन परिस्थितियों में प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। 1. जिन लोगों की उम्र 18 साल से 60 साल के बीच है और जिनका वजन 50 किलो से अधिक है सिर्फ वही लोग अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं 2. अगर कोरोना मरीज एसिम्प्टोमैटिक था यानी उसमें कोई लक्षण नहीं थे तो कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 14 दिन के बाद ही वह व्यक्ति अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। अगर मरीज में बीमारी के हल्के लक्षण भी थे तो वह मरीज लक्षण पूरी तरह से ठीक होने के 14 दिन के बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। 3. जो महिलाएं कभी गर्भवती हो चुकी हैं, वे भी अपना कोविड-19 प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकतीं। 4. अगर किसी व्यक्ति को कोविड-19 की वैक्सीन लगी है तो वैक्सीन लगने के 28 दिन बाद तक वह व्यक्ति प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकता। 5. प्लाज्मा डोनेट करने वाले व्यक्ति का हीमोग्लोबिन काउंट 8 से ऊपर होना चाहिए और उसे कैंसर, हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज या हाइपरटेंशन जैसी कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए।

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