मध्यप्रदेश

ठिठुरा मध्यप्रदेश:पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवा से प्रदेश में पारा 3 डिग्री तक लुढ़का, कई जिलों में शीतलहर का अलर्ट, अभी ठंड यूं ही दिखाएगी तेवर

उत्तर भारत के पहाड़ों में हो रही बर्फबारी और वहां से मैदानी इलाकों की ओर आ रही बर्फीली हवाओं से MP ठिठुरने लगा है। यहां पर न्यूनतम तापमान 3 डिग्री पर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने ठंड से बचने के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग शीतलहर की चपेट में आ चुके हैं। भोपाल में जहां सीजन की सबसे सर्द रात रही, यहां न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री पर पहुंच गया है। तीन दिन में 7 डिग्री तक पारा लुढ़का है। बुधवार को भोपाल का न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री था। शुक्रवार को सीजन का पहला कोल्ड डे था और शनिवार को भी कोल्ड डे रहने के संकेत मिल रहे हैं।

प्रदेश में सबसे कम तापमान में उमरिया में 3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इसके पहले शुक्रवार को दतिया में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री तक चला गया था। MP के 9 शहरों में न्यूनतम तापमान 3-5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। इसमें उमरिया, दतिया, गुना, खजुराहो, शाजापुर, रीवा, ग्वालियर, नौगांव और रायसेन शामिल है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, अभी कुछ दिन ठंड के तीखे तेवर से राहत की उम्मीद नहीं दिख रही है। हालांकि 20 दिसंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ ( Western disturbance) के उत्तर भारत पहुंचने की संभावना है, लेकिन यह सिस्टम कमजोर है। इस वजह से इसका मौजूदा मौसम के मिजाज पर विशेष प्रभाव पड़ने के आसार कम रहेगा।

वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि उत्तर भारत कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं। हवा का रुख लगातार उत्तरी बना हुआ है। साथ ही हवा की रफ्तार भी 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है। वर्तमान में प्रदेश और आसपास कोई वेदर सिस्टम भी सक्रिय नहीं है। इस वजह से वातावरण में नमी भी नहीं है। इससे आसमान साफ है और कोहरा भी गायब हो गया है। मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहने के कारण ही दिन और रात के तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी है।

मौसम विज्ञानी जीडी मिश्रा ने बताया कि 20 दिसंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने की संभावना है। आवृति कम होने के कारण इस सिस्टम का मौजूदा मौसम के मिजाज पर असर होने की उम्मीद कम ही है। इस वजह से 24 दिसंबर तक ठंड के तेवर तीखे बने रह सकते हैं। इस दौरान प्रदेश के कुछ और हिस्से भी शीतलहर की चपेट में आ सकते हैं। कुछ इलाकों में पाला पड़ने की भी संभावना है, जिससे चना, आलू, हरी सब्जियों की फसल को नुकसान हो सकता है।

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